दुनिया भर के सभी अज़ादारों को ईद ऐ ज़हरा की मुबारकबाद | संचालक जौनपुर अज़ादारी डॉट कॉम पूरे दो महीने आठ दिन इमाम हुसैन (अ.स) के अज़ादार , क...
दुनिया भर के सभी अज़ादारों को ईद ऐ ज़हरा की मुबारकबाद | संचालक जौनपुर अज़ादारी
डॉट कॉम
पूरे दो महीने आठ दिन इमाम हुसैन (अ.स) के अज़ादार , कर्बला के सहीदों का ग़म मनाने के बाद आज 9 रबी'उल अव्वल को एक बार फिर से खुशियाँ मनाने लगते हैं | लोगों के जिस्म पे काले कपड़ों की जगह लाल पीले रंगबिरंगे कपडे आ जाते हैं और लोग घरों में मीठे पकवान बनाते हैं , मछली पकाते हैं और महिलाएं जिन्होंने मुहर्रम शुरू होते ही अपने सुहाग की निशानी चूड़ियाँ उतार दी थीं फिर से पहल लेती हैं |
आयतुल्लाह काशिफ अल-गिताह कहते हैं कि : " शिया पुराने ज़माने से रबी उल-अव्वल की नवी तारीख को ईद की तरह ख़ुशी मनाते हैं| आज हम्रारे लिए इस दिन की अहमियत इस लिए भी बढ़ गयी है क्यूँ की यह ईमाम ज़माना (अ:त:फ) की ईमामत का पहला दिन है! कुछ रवायतों में कहा गया है की यह 9 और 10 रबी उल-अव्वल पैग़म्बर इस्लाम की जनाब खदीजा से शादी का रोज़ है| बाज़ उलमा की तहकीक के मुताबिक 9 रबी उल-अव्वल को जनाब रसूल ख़ुदा (स:अ:व:व) की शादी जनाब ख़दीजा (स;अ) से हुई थी और हज़रात फ़ातमा ज़हरा (स:अ) हर साल इस शादी की साल गिरह मनाती थीं, और जशन किया करती थीं, नए लिबास और अच्छे खानों का इंतजाम किया करती थीं, इसलिए आप की सीरत पर अमल करते हुए शिया औरतों ने भी यह साल गिरह मनानी शुरू की, और यह सिलसिला इसी तरह चलता रहा, आप (स:अ) के बाद यह ख़ुशी आप (स:अ) से मंसूब हो गयी और इसी तरह 9 रबी उल-अव्वल का रोज़ शियों के दरम्यान ईद-ए-ज़हरा (स:अ) के नाम से रख दिया गया, इसलिए ईद-ए-ज़हरा (स:अ) की यह वजह मुनासिब मालूम होती है|
बाज़ लोग यह भी कहते हैं की जनाब मोख्तार (र:अ) ने इब्न ज्याद का सर इमाम जैन अल-आबेदीन (अ:स) की खिदमत में मदीना भेजा और जिस रोज़ यह सर चौथे ईमाम (अ:स) की खिदमत में पहुंचा वोह रबी उल-अव्वल की 9 तारीख थी, ईमाम (अ:स) ने इब्न ज्याद का सर देख कर खुदा का शुक्र अदा किया और मोख्तार (र:अ) को दुआएँ दीं और ठीक इसी वक़्त इन औरतों ने बालों में कँघी और सर में तेल डालना और आँखों में सुरमा लगाना शुरू किया जो वाकये कर्बला के बाद इन चीज़ों को छोड़े हुए थीं!
वजह जो भी हो लेकिन रवायतों के अनुसार यह तय है की जनाब ऐ ज़हरा भी इस दिन इद् मनाती थीं और यह दिन इमाम ऐ ज़माना की इमामत का पहला दिन है और कर्बला में हुए ज़ुल्म का बदला इमाम ऐ ज़माना इमाम मेहदी इब्ने इमाम हसन अस्करी को ही लेना है इसलिए भी अह्लेबय्त के चाहने वालों के लिए ये दिन ख़ुशी का दिन है |
अह्लेबय्त के चाहने वालों को चाहिए कि इस दिन इमाम ऐ ज़माना के जल्द ज़हूर की दुआ सच्चे दिल से और अपने अमल से करें | यकीनन आपके गुनाह इमाम ऐ ज़माना के ज़हूर में देरी की सबसे बड़ी वजह है |
गुनाहों से बचते हुए आज के दिन इमाम ऐ ज़माना के ज़हूर की दुआ करना और खुद को अह्लेबय्त के दुश्मनों के अंजाम दिए गुनाहों से बचाते हुए दिन गुजारना और खुशियाँ मनाना सबसे बेहतर अमल है |दिन ज्यारत आले यासीन और दुआ-ए-सनमिए कुरैश पढने का बहुत सवाब है|
पूरे दो महीने आठ दिन इमाम हुसैन (अ.स) के अज़ादार , कर्बला के सहीदों का ग़म मनाने के बाद आज 9 रबी'उल अव्वल को एक बार फिर से खुशियाँ मनाने लगते हैं | लोगों के जिस्म पे काले कपड़ों की जगह लाल पीले रंगबिरंगे कपडे आ जाते हैं और लोग घरों में मीठे पकवान बनाते हैं , मछली पकाते हैं और महिलाएं जिन्होंने मुहर्रम शुरू होते ही अपने सुहाग की निशानी चूड़ियाँ उतार दी थीं फिर से पहल लेती हैं |
आयतुल्लाह काशिफ अल-गिताह कहते हैं कि : " शिया पुराने ज़माने से रबी उल-अव्वल की नवी तारीख को ईद की तरह ख़ुशी मनाते हैं| आज हम्रारे लिए इस दिन की अहमियत इस लिए भी बढ़ गयी है क्यूँ की यह ईमाम ज़माना (अ:त:फ) की ईमामत का पहला दिन है! कुछ रवायतों में कहा गया है की यह 9 और 10 रबी उल-अव्वल पैग़म्बर इस्लाम की जनाब खदीजा से शादी का रोज़ है| बाज़ उलमा की तहकीक के मुताबिक 9 रबी उल-अव्वल को जनाब रसूल ख़ुदा (स:अ:व:व) की शादी जनाब ख़दीजा (स;अ) से हुई थी और हज़रात फ़ातमा ज़हरा (स:अ) हर साल इस शादी की साल गिरह मनाती थीं, और जशन किया करती थीं, नए लिबास और अच्छे खानों का इंतजाम किया करती थीं, इसलिए आप की सीरत पर अमल करते हुए शिया औरतों ने भी यह साल गिरह मनानी शुरू की, और यह सिलसिला इसी तरह चलता रहा, आप (स:अ) के बाद यह ख़ुशी आप (स:अ) से मंसूब हो गयी और इसी तरह 9 रबी उल-अव्वल का रोज़ शियों के दरम्यान ईद-ए-ज़हरा (स:अ) के नाम से रख दिया गया, इसलिए ईद-ए-ज़हरा (स:अ) की यह वजह मुनासिब मालूम होती है|
बाज़ लोग यह भी कहते हैं की जनाब मोख्तार (र:अ) ने इब्न ज्याद का सर इमाम जैन अल-आबेदीन (अ:स) की खिदमत में मदीना भेजा और जिस रोज़ यह सर चौथे ईमाम (अ:स) की खिदमत में पहुंचा वोह रबी उल-अव्वल की 9 तारीख थी, ईमाम (अ:स) ने इब्न ज्याद का सर देख कर खुदा का शुक्र अदा किया और मोख्तार (र:अ) को दुआएँ दीं और ठीक इसी वक़्त इन औरतों ने बालों में कँघी और सर में तेल डालना और आँखों में सुरमा लगाना शुरू किया जो वाकये कर्बला के बाद इन चीज़ों को छोड़े हुए थीं!
वजह जो भी हो लेकिन रवायतों के अनुसार यह तय है की जनाब ऐ ज़हरा भी इस दिन इद् मनाती थीं और यह दिन इमाम ऐ ज़माना की इमामत का पहला दिन है और कर्बला में हुए ज़ुल्म का बदला इमाम ऐ ज़माना इमाम मेहदी इब्ने इमाम हसन अस्करी को ही लेना है इसलिए भी अह्लेबय्त के चाहने वालों के लिए ये दिन ख़ुशी का दिन है |
अह्लेबय्त के चाहने वालों को चाहिए कि इस दिन इमाम ऐ ज़माना के जल्द ज़हूर की दुआ सच्चे दिल से और अपने अमल से करें | यकीनन आपके गुनाह इमाम ऐ ज़माना के ज़हूर में देरी की सबसे बड़ी वजह है |
गुनाहों से बचते हुए आज के दिन इमाम ऐ ज़माना के ज़हूर की दुआ करना और खुद को अह्लेबय्त के दुश्मनों के अंजाम दिए गुनाहों से बचाते हुए दिन गुजारना और खुशियाँ मनाना सबसे बेहतर अमल है |दिन ज्यारत आले यासीन और दुआ-ए-सनमिए कुरैश पढने का बहुत सवाब है|


