जौनपुर के कई इलाकों में निकला इमाम हुसैन (अ. स ) के लुटे हुए काफिले का जुलूस , अमारियों के साथ अंजुमनों ने किया नौहा और मातम शरीके फ...
जौनपुर के कई इलाकों में निकला इमाम हुसैन (अ. स ) के लुटे हुए काफिले का जुलूस , अमारियों के साथ अंजुमनों ने किया नौहा और मातम
शरीके फतह शहे मशरैकेन बन के उठी, न थे हुसैन तो जैनब हुसैन बन के उठी ... जिले के विभिन्न इलाकों में रविवार को लुटे हुए काफिले की याद में जुलूस निकाला गया। इस दौरान अंजुमनों ने उक्त नौहा पढ़कर न सिर्फ कर्बला के शहीदों को नजराने अकीदत पेश किया बल्कि 10 मोहर्रम के बाद जब लूटा हुआ काफिला कर्बला से मदीने के लिए रवाना हुआ तो उसका बयां ये नौहे की पंक्तियां अपने आप कर रही थी। नगर के बाजारभुआ अंतर्गत इमामबारगाह अकबर मरहूम पानदरीबा रोड पर जुलूस का आयोजन हुआ जिसकी शुरुआत सोजखानी मरहूम मोहम्मद मुस्लिम के हमनवा ने किया। जिसके बाद खतीबे अहलेबैत मौलाना डा. कमर अब्बास ने मजलिस को खेताब किया और जुलजनाह अलम और तुर्बत का जुलूस बरामद हुआ। जिसके हमराह नगर की सभी अंजुमनों ने नौहा और मातम शुरु किया। जुलूस इमामबाड़ा शेख इस्लाम मरहूम चैक पर पहुंचा जहां मौलाना निसार हुसैन खां ने तकरीर की। इसके बाद जुलूस पुनरू नौहा मातम करता हुआ आगे बढ़ा और इमामबाड़ा मीर बहादुर अली दलान पहुंचा जहां जनाब सै. बाकर मेंहदी ने तकरीर की जिसके बाद अमारियां बरामद हुई और जुलूस आगे बढ़ा।

अपने कदीमी रास्तों से गुजरता हुआ जुलूस सै. शब्बीर हसन जेडी के आवास के पास पहुंचा जहां सै. कैसर नवाब ने तकरीर करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया में हजरत इमाम हुसैन का गम मनाया जा रहा है। जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सबसे पहली आवाज उठायी थी, पर लगता है कि आज भी यजीद के मानने वाले जिंदा है, तभी तो मजलिस मातम व जुलूसों पर आतंकी हमला कर इमाम का गम मनाने वालों को शहीद किया जा रहा है। हम सब लोग इसकी निंदा करते है और हुकूमत से ये मांग करते है कि सभी मुल्क एकजुट होकर आतंकवाद को समाप्त करने के लिए लड़ाई लड़े। मजलिस के बाद मरहूम शेख शब्बीर हसन के मकान से तुर्बत बरामद हुई जिसे जुलजनाह से मिलाया गया और जुलूस इमामबारगाह अकबर मरहूम के लिए रवाना हुआ जहां पहुंुचकर जुलूस ठंडा किया गया।