शार्की बादशाहों ने जौनपुर में बहुत से इमामबाड़े ,रौज़े बनवाये जिसे देख के ऐसा लगता है की वो जौनपुर को बग़दाद की शक्ल देना चाहते थे और बहुत हद ...
शार्की बादशाहों ने जौनपुर में बहुत से इमामबाड़े ,रौज़े बनवाये जिसे देख के ऐसा लगता है की वो जौनपुर को बग़दाद की शक्ल देना चाहते थे और बहुत हद तक इसमें कामयाब भी थे | लेकिन इब्राहीम लोधी ने इसे तोड़ दाल और बहुत बर्बाद किया | फिर भी बहुत से रौज़े और इमामबाड़े आज भी बचे हुए हैं | ख़ास कर के जो शहर जौनपुर के अंदर हैं उनमे आज भी अज़ादारी बड़े जोर शूर और खुलूस के साथ हुआ करती है |
सदर इमाम बाड़ा , इस्लाम का चौक ,कल्लू का इमामबाडा ,अकबर का इमामबाड़ा ,इमामबाड़ा मीर घर, इमाम बाड़ा भुआ बीबी (दल्लान) ,इमाम बाड़ा ज़किया बीबी, इत्यादि सभी एक डेढ़ किलोमीटर के दायरे में बने हैं और सभी का शुमार क़दीमी इमामबाड़ों में किया जाता है | मुहर्रम और सफ़र के महीने में इन इमामबाड़ों में अज़ादारी ऐसे हुआ करती है जिसे देख कर्बला की याद आ जाती है |

सदर इमाम बाड़ा , इस्लाम का चौक ,कल्लू का इमामबाडा ,अकबर का इमामबाड़ा ,इमामबाड़ा मीर घर, इमाम बाड़ा भुआ बीबी (दल्लान) ,इमाम बाड़ा ज़किया बीबी, इत्यादि सभी एक डेढ़ किलोमीटर के दायरे में बने हैं और सभी का शुमार क़दीमी इमामबाड़ों में किया जाता है | मुहर्रम और सफ़र के महीने में इन इमामबाड़ों में अज़ादारी ऐसे हुआ करती है जिसे देख कर्बला की याद आ जाती है |


