मैं हमेशा कहा करता हूँ कि जौनपुर की अज़ादारी को देख के कर्बला की याद आती है । जौनपुर का सिपाह इलाक़ा भी अज़ादारी के मामले में बहुत मशहूर ...
मैं हमेशा कहा करता हूँ कि जौनपुर की अज़ादारी को देख के कर्बला की याद आती है । जौनपुर का सिपाह इलाक़ा भी अज़ादारी के मामले में बहुत मशहूर है और साल भर यहां अज़ादारी हुआ करती है । अज़ादारी ऐ हुसैन (अ.स) को दो हिस्सों में बांटने पे पता लगता है की इसके पहले हिस्से में ज़िक्र ऐ हुसैन , मर्सिया, नौहा और मातम का शुमार है जिसकी शुरुआत कर्बला के बाद से ही हो गयी थी और पहली जाकिर जनाब ऐ जैनब खुद थीं |अज़ादारी के दुसरे हिस्से में जुलूस ऐ अजा , ताजियादारी, शब्बेदारी वगैरह का शुमार हुआ करता है|
जौनपुर के सिपाह इलाक़े में एक क़दीमी इमामबाड़ा सहनची के नाम से मसहूर है जिसकी देख रेख जनाब कुमैल साहब किया करते है और इस इमामबाड़े के मुतवल्ली जनाब अख्तर इमाम साहब है । यहां से अज़ादारी के कई जुलुस निकलते हैं और मजलिस हुआ करती है जिसमे मशहूर है २८ रजब का जुलुस, ४ मुहर्रम का जुलूस और इमामबाड़ा सहनची से हर वर्ष ९ मुहर्रम को दोपहर एक आलीशान जुलुस ऐ अज़ादारी बरामद होता है । १० मुहर्रम को बाद मजलिस जुलूस सहंची से इमामबाड़ा नबी साहब होता हुआ सदर इमाम बाड़ा जाया करता है और उसके बाद चेहल्लुम तक हर शब ऐ जुमा मजलिसें हुआ करती है ।
इस वर्ष भी जनाब अख्तर इमाम साहब ने मुझे हर साल की तरह बुलाया और मैं जा पहुंचा इस बार अपने कैमरे के साथ और क़ैद किये वो मंज़र देख के आप भी कह उठेगे की जौनपुर की अज़ादारी को देख के कर्बला की याद आती है ।
जौनपुर के सिपाह इलाक़े में एक क़दीमी इमामबाड़ा सहनची के नाम से मसहूर है जिसकी देख रेख जनाब कुमैल साहब किया करते है और इस इमामबाड़े के मुतवल्ली जनाब अख्तर इमाम साहब है । यहां से अज़ादारी के कई जुलुस निकलते हैं और मजलिस हुआ करती है जिसमे मशहूर है २८ रजब का जुलुस, ४ मुहर्रम का जुलूस और इमामबाड़ा सहनची से हर वर्ष ९ मुहर्रम को दोपहर एक आलीशान जुलुस ऐ अज़ादारी बरामद होता है । १० मुहर्रम को बाद मजलिस जुलूस सहंची से इमामबाड़ा नबी साहब होता हुआ सदर इमाम बाड़ा जाया करता है और उसके बाद चेहल्लुम तक हर शब ऐ जुमा मजलिसें हुआ करती है ।
इस वर्ष भी जनाब अख्तर इमाम साहब ने मुझे हर साल की तरह बुलाया और मैं जा पहुंचा इस बार अपने कैमरे के साथ और क़ैद किये वो मंज़र देख के आप भी कह उठेगे की जौनपुर की अज़ादारी को देख के कर्बला की याद आती है ।
| कुमैल साहब इमामबाड़ा सहनची सिपाह जौनपुर के सामने । |


