यह सवाल अक्सर लोग पूछते हैं की मासूम भाई आपने जौनपुर की अज़ादारी की यह ऐतिहासिक वेबसाईट जो बनाई उसका ख्याल आपने ज़हन में कैसे आया ? आ...

यह सवाल अक्सर लोग पूछते हैं की मासूम भाई आपने जौनपुर की अज़ादारी की यह ऐतिहासिक वेबसाईट जो बनाई उसका ख्याल आपने ज़हन में कैसे आया ?
आज सोंचा जवाब दे ही दूं |
अज़ादारी वैसे तो हर हुसैन (अ.स) के चाहने वाले की तरबियत में हुआ करती है जिसका पूरा श्रेय उसकी माँ को जाता है और ठीक इसी तरह मुझे भी मेरी माँ और मेरे परिवार से अज़ादारी तरबियत में मिली और जौनपुर के ऐसे बहुत से ऐतिहासिक इमामबाड़े भी हैं जिनकी तामील में मेरे घराने का योगदान रहा है और आज भी इसी घराने के वक्फ किये इमामबाड़े और मदरसे जौनपुर में मौजूद हैं |
बस यूँ की एक साल मैं चेहल्लुम में जौनपुर नहीं आ पाया और दिल था की चेहल्लुम देखा जाय की अचानक मुझे पता लगा की सहारा के कमर हसनैन दीपू जी के सहयोग के कारण यह लाइव टेलीकास्ट हो रहा है और वो प्रोग्राम इतना मशहूर हुआ की मुझे लगा की अज़ादार जौनपुर की अज़ादारी में रूचि रखते हैं औ'र इसे देखना , सुनना चाहते हैं | बस फिर क्या था जौनपुर अज़ादारी की वेबसाईट वजूद में आ गयी और श्रेय गया जनाब कमर हसनैन दीपू साहब को |
इसके बाद मैंने तुरंत मौलाना सफ़दर साहब से मशविरा किया और उनके सहयोग में जौनपुर के क़दीमी इमामबाड़ों को देखने और समझने का अवसर आसानी से मिल गया | इस प्रकार कमर हसनैन दीपु और मौलाना सफ़दर साहब के सहयोग से इस वेबसाईट को मैंने शुरू किया |
उसके बाद तो यहाँ की अज़ादारी का इतिहास तो मेरे घराने की कई किताबों में दर्ज है और मैंने खुद तहकीक करके उसे पेश किया और कोशिश की कि अज़ादारी और अजादारों का कोई हिस्सा बाक़ी न रह जाय | कुछ लोगों को इस वेबसाईट की लोकप्रियता से ऐसा लगा की उनकी वेबसाईट इस बरगद के नीचे चुप गयी लेकिन ऐसा था नहीं क्यूँ की हर इंसान की एक जैसी प्रतिभा नहीं हुआ करती और वैसे भी यह काम हुसैन (अ.स) की मुहब्बत में किया जाता है और अल्लाह से ही इसका सिला मिलेगा ऐसी उम्मीद की जाती है इसलिए अज़ादारी की जितनी भी वेसाईट बन जाय यह एक दुसरे की सहयोगी तो हो सकती हैं लेकिन प्रतिस्पर्धी नहीं हो सकती |
मेरा ध्यान जौनपुर की अज़ादारी के इतिहास पे ,यहाँ के अजादारों की कुर्बानी पे ,उनकी प्रतिभा पे अधिक रहता है और इसके साथ साथ यह कोशिश हुआ करती हैं की आज जो लोग अज़ादारी कर रहे हैं वो इसे बेहतर से बेहतर अंदाज़ में इसे दुनिया तक पहुंचाएं |
जौनपुर अज़ादारी की हर खिदमात मुफ्त हुआ करती है और मकसद पूरी दुनिया तक इसे पहुंचाना और अह्लेबय्त के पैगाम को लोगों तक पहुंचाना हुआ करता है |
एस एम् मासूम
कमर हसनैन दीपु से एक बात चीत आप भी सुनें |



