जौनपुर का दूसरा इमामबाडा दालान का इमामबाड़ा |
आज भी यह इमामबाड़ा आबाद है और पूरे साल यहाँ मजलिसें और अज़ादारी हुआ करती है जिसके लिए यहाँ के इंतज़ाम करने वालों का जौनपुर अज़ादारी टीम शुक्रगुजार है | इमामबाड़ा मीर बहादुर अली दालान से सफ़र की नौचंदी को पिछले ७६ सालों से अलम उठता है जिसके लिए मशहूर है की सन् 1943 में जब पूरा शहर प्लेग नामक महामारी के चपेट में था और बड़ी संख्या में लोगो की मौत हो रही थी। इस दैवीय आपदा से तमाम उपायों के बाद भी छुटकारा नही हो पा रहा था तब इस जुलूस के संस्थापक जुल्फेकार हुसैन रिजवी ने अपने दो साथियों के के साथ अलम उठाने का संकल्प लिया और अलम उठाया अलम को महामारी के प्रकोप वाले रास्ते से घुमाया गया और ईश्वरीय चमत्कार यह हुआ कि फ्लैग विमारी से लोगो को निजात मिलने लगी।
यह परम्परा उसी समय से चली आ रही है। इस अलम के प्रति लोगो में बड़ी आस्था है।
नोट : इस इमामबाड़े से जुडी कोई और तहकीक हो किसी के पास दो अज़ादारी जौनपुर की टीम की मदद करें और उसे हम तक पहुंचाएं | उसे आपके नाम से दुनिया तक पहुँचाने में और शोधकर्ताओं तक पहुंचाने में हमें ख़ुशी होगी | इस पेश किये इतिहास में कोई गलती हो अवश्य बताएं जिसे की उसे शोधकर्ताओं तक पहुंचाया जा सके और जौनपुर के इमामबाड़ों का सत्यापित इतिहास सामने लाया जा सके | लेकिन बेबुनियाद एतराजात से जौनपुर की अज़ादारी के काम में रुकावट ना डालें | यह मजलूम हुसैन (अ.स ) की अज़ादारी का मामला है और उम्मीद है हर हुसैनी आगे बढ़ के इसमें मदद करेगा |

यह परम्परा उसी समय से चली आ रही है। इस अलम के प्रति लोगो में बड़ी आस्था है।
नोट : इस इमामबाड़े से जुडी कोई और तहकीक हो किसी के पास दो अज़ादारी जौनपुर की टीम की मदद करें और उसे हम तक पहुंचाएं | उसे आपके नाम से दुनिया तक पहुँचाने में और शोधकर्ताओं तक पहुंचाने में हमें ख़ुशी होगी | इस पेश किये इतिहास में कोई गलती हो अवश्य बताएं जिसे की उसे शोधकर्ताओं तक पहुंचाया जा सके और जौनपुर के इमामबाड़ों का सत्यापित इतिहास सामने लाया जा सके | लेकिन बेबुनियाद एतराजात से जौनपुर की अज़ादारी के काम में रुकावट ना डालें | यह मजलूम हुसैन (अ.स ) की अज़ादारी का मामला है और उम्मीद है हर हुसैनी आगे बढ़ के इसमें मदद करेगा |


