दुनिया हमारे व्यवहार से किरदार से , हमारे धर्म की किताब और हमारे धर्म के महापुरुषों को पहचानती है और हम धर्म की किताब से और अपने धर्म के ...
दुनिया हमारे व्यवहार से किरदार से , हमारे धर्म की किताब और हमारे धर्म के महापुरुषों को पहचानती है और हम धर्म की किताब से और अपने धर्म के महापुरुषों की तारीफ से खुद को पहचनवाने की मूर्खता करते हैं और अपने धर्म को बदनाम करवाते हैं | मिसाल के तौर पे आप अगर खुद को मुस्लमान और शिया ने अली कहते हैं तो गैर मुस्लिम आपके किरदार से समाज में आपके मुआमलात से क़ुरआन को और अली की शख्सियत को पहचानेगा और हम क़ुरआन की आयतों के तर्जुमे और अली की हदीसों उनकी नेकियों के बयान से खुद को पहचनवाने की कोशिश करते हैं लेकिन क़ुरान और अली के बताय उन्ही तरीकों पे चलते नहीं | ऐसे में गैर मुस्लिम आप की बात पे यक़ीन नहीं करेगा और इस्लाम बदनाम होता रहेगा | ..एस एम् मासूम


