इमाम बारगाह मरकज़ी कल्लू मरहूम मख़दूम शाह अढ़हन को 1851 मे खान बहादुर सैय्यद फरहत अली मरहूम के पोते सैय्यद जलालुद्दीन मरहूम इब्ने सैय्यद ...
इमाम बारगाह मरकज़ी कल्लू मरहूम मख़दूम शाह अढ़हन को 1851 मे खान बहादुर सैय्यद फरहत अली मरहूम के पोते सैय्यद जलालुद्दीन मरहूम इब्ने सैय्यद फैय्याज़ अली ने तामिर करवाया था सैय्यद जलालुद्दीन का ख़ानवादा हमाम दरवाज़ा मोहल्ला में आबाद था सैय्यद जलालुद्दीन सरायमीर के सादाते नक़वी ख़ानवादे से ताल्लुक़ रखते थे आपकी शादी कचगाँव में मौलाना सैय्यद गुलशन अली अव्वल ताबा सरा दीवाने रियासते बनारस की पोती से हुई थी सैय्यद जलालुद्दीन हमाम दरवाज़ा के कोई औलाद नहीं थी उनके ख़िदमत गुज़ार कल्लू मरहूम इसकी निगरानी करते थे ये इमामबारगाह उन्ही के नाम से मन्सूब हो गया सैय्यद जलालुद्दीन मरहूम के
ज़यादातर अफरादे ख़ानदान पाकिस्तान मुन्तक़ील हो गये आपके क़रीबी अज़ीज़ो में खानवादे ज़ुलक़द्र बहादुर ,ज़ुल्क़दर मन्ज़िल पानदरीबा है इसलिए सैय्यद हादी हसन कमीश्नर मरहूम ने इस इमामबारह को वक़फ अल्ल अवाम क़रार देकर मोमेनीन के हवाले कर दिया शुरु शुरू में मख़दूम शाह अढ़हन के मोमेनीन बिल ख़ुसूस मोहम्मद हसन मद्दा मरहूम जो कि फक़ीर हुसैन एडवोकेट मरहूम के वालिद थे वोह इस इमामबारगाह की देख रेख करते थे और मोमेनीन की मदद से इसकी मरम्मत करवाते रहते थे इसके वक़फ करार दिए जाने पर अनीस अहमद खाँ मरहूम ताड़तला इसके पहले मुतवल्ली हुए अनीस खाँ मरहूम और इस इमाम बारगाह की इन्तेज़ामिया कमेटी ने इस इमामबारगाह की मरम्मत व तज़ीन कारी कराई जिसमें आयतुल्ला मौलाना सैय्यद मोहसीन नवाब ताबासरा , प्रिन्सपल जामिया नासिरया और उनके बाद आयतुल्ला मौलाना सैय्यद वसी मोहम्मद आब्दी फैज़बादी मरहूम ताबासरा जो मदरसा नासिरया के प्रिन्सपल व इमामे जुमा जौनपुर थे कि खास अपील पर मोमेनीन बिलखुसूस मोमेनीने मुम्बई ने ताऊन किया , इस कोशीश को अमली जामा पहनाने में मौलाना सै .जर्रार हुसैन ताबासरा , नवाब सैय्यद नाज़िम हुसैन नवाब नज्जू मरहूम , फकीर हुसैन एडवोकेट मरहूम अल्हादी खाँ मरहूम ताड़तला , सैय्यद ज़ाहिद मरहूम मख़दूम शाह अढ़हन (हाल मुक़ीम बम्बई ) वग़ैरह पेश पेश रहे आयतुल्ला मौलाना महमुदुल हसन खाँ ताबासरा के प्रिनिसपल नासिरया व इमामे जुमा जौनपुर होने पर इस इमामबारगाह में उनकी अपील पर सै .मोहम्मद अहसन लल्लू सेठ मरहूम जो कि हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैय्यद सफदर हुसैन ज़ैदी साहब के ससुर हैं उन्होने फात्मी हाल की तामीर कराई अनीस अहमद खाँ मरहूम के बाद इस इमाम बारगाह के मुतवल्ली शेख़ नियाज़ हैदर हुए और उसके बाद मौजूदा मुतवल्ली शौकत अली खाँ मुन्ना अकेला हैं मुतवल्ली के साथ साथ इमाम बारगाह इन्तेज़ामिया कमेटी इस इमामबारगाह की तरक़्क़ी के लिए मेहनत करती रहती है अल्लाह जज़ा ए ख़ैर दे
असलम नक़वी


