दो सौ वर्ष पहले जौनपुर पक्कड तले के शाह मुर्तजा रईस हज्ज और जियारत करने गये तो वहा से हजरत मुहम्मद साहब पे पदचिन्ह और दस्त ए अली के चिन्ह ...
दो सौ वर्ष पहले जौनपुर पक्कड तले के शाह मुर्तजा रईस हज्ज और जियारत करने गये तो वहा से हजरत मुहम्मद साहब पे पदचिन्ह और दस्त ए अली के चिन्ह ली आये जिसे पहले पंजे शरीफ मे रखा गया और बाद मे उसे एक दिन हमजा पूर मे एक चबुतरा बना के राख दिया गया | ये बात जौनपुर के पंजे शरीफ के लोगो को बुरी लगी और एक रात सबने मिल के फैसला किया की हमजा पूर से क़दम ए रसूल और दफ्त ए इमाम अली उखाड के ले आय जाय लेकीन जब लोग वहा पहुंचे तो देखा एक शेर वहा उसकी हिफाजत कर रहा है | इस चमत्कार के देख सभी वापस आ गये और आज तक क़दम ए रसूल और दफ्त ए इमाम अली रौजा हमजा पूर मे है |
दस मुहर्रम को यहा बडी भीड होती है इमाम हुसैन के चाहने वालो की | REf : जौनपुर नामा


