इमाम हुसैन (अ.स) के चाहने वाले दुनिया के हर कोने मैं आज मौजूद हैं |मुहर्रम का चाँद देखते ही अज़ादारी ऐ हुसैन में कोई कमी नहीं रखते और बड़े ...
यहाँ पे एक क़दीमी दफ़न गाह है जिसमे गाँव भर के सभी ताजिये 10 मुहर्रम को दफन होते हैं |इसे बेगम खान बहादुर मुहम्मद मुस्तफा साहब ने बनवाया था |हाजी जुम्मन खान का इमामबाडा तकरीबन २३० साल पुराना है जिसे जनाब सय्यद नज़र हसन (मौलू) साहब के घराने के लोग देखते हैं |
इमामबाडा हुसैनिया गुलशन अली : इस इमामबाड़े को मरहूम मौलाना गुलशन अली साहब जो उस वक़्त दीवान बनारस रियासत भी थे , ने बनवाया था| आज भी उन्ही के खानदान वाले इसकी देख रेखा करते हैं और यह आज भी अच्छी हालत में है |
पांचवीं, नवीं मुहर्रम और सुबह ऐ आशूर का खंदक यहाँ का मशहूर है |
गोल कोठी कजगांव के जनाब मुहम्मद अहमद साहब ने एक रौज़ा हजरत अब्बास अलमदार की शुरुआत की है जिसका जिसे कर्बला में मौजूद रौज़ा ऐ अब्बास की तरह बनाने की कोशिश की जा रही है |


