आज 5 नवम्बर २०१३ की शाम जौनपुर में मुसलमानों ने मुहर्रम का चाँद देखा | उनकी आँखों में पानी इमाम हुसैन (अ.स) पे हुए ज़ुल्म को याद करके छल...
आज 5 नवम्बर २०१३ की शाम जौनपुर में मुसलमानों ने मुहर्रम का चाँद देखा | उनकी आँखों में पानी इमाम हुसैन (अ.स) पे हुए ज़ुल्म को याद करके छलक आया | मुहर्रम का चाँद होते ही कर्बला में यजीद जैसे ज़ालिम बादशाह के सैनिकों द्वारा शहीद किये गए हजरत मुहम्मद (स.अ.व) के नवासे इमाम हुसैन (अ.स) को याद करके मुसलमान अज़ादारी , मजलिस , नौहे , अज़ादारी जुलुस निकालते हैं| ताजिये रखते हैं और दुनिया को अमन का पैगाम देते हैं |
इस्लाम के चौक में चाँद देखते ही तबल बजने लगते हैं जिनकी आवाज़ से यह एलान होता है की यह चाँद रात है और कल से मुहर्रम का महिना शुरू हो रहा है| औरतें अपने सुहाग की चिंता किया बिना चूड़ियाँ तोड़ देती हैं | सारे मर्द औरत काले कपडे पहन के दुःख का इज़हार करते हैं |इमामबाड़े सज जाते हैं फर्श ऐ अजा बिछ जाती है और दस दिनों के लिए मजलिस शुरू हो जाते है| कल से शहर के किसी ना किसी इलाके से जुलुस ऐ अलम और ताज़ा नुक्लेगा जिसमे हज़ारों की तादात में मुसलमान हिन्दू शरीक होते हैं इमाम हुसैन (अ.स) और उनके परिवार की कुर्बानियों को नौहे और गिरया कर के याद करते और आंसू बहाते और मातम करते हैं |
बाज़ार भुआ स्थित शेंख इस्लाम का चौक पे मुहर्रम का चाँद देखने के लिए मुसलमान दुःख का इज़हार करते काले कपड़ों में अलम हजरत अब्बास सजा के खड़े रहते हैं और चाँद देखते ही यह अलम इमामबाड़ा मीर भर की तरफ जाता है फिर वहाँ से इमाम बड़ा दल्लान होता हुआ जौनपुर के अन्य इमामबाड़ों में अजादारों के सामने इमाम हुसैन (अ.स) की शहादत को याद करता या हुसैन या हुसैन की सदा बुलंद करता घूमता है |
इस्लाम के चौक में ग़म ऐ हुसैन में अपना सुहाग बढाया शिया महिलाओं ने |



इस्लाम के चौक में चाँद देखते ही तबल बजने लगते हैं जिनकी आवाज़ से यह एलान होता है की यह चाँद रात है और कल से मुहर्रम का महिना शुरू हो रहा है| औरतें अपने सुहाग की चिंता किया बिना चूड़ियाँ तोड़ देती हैं | सारे मर्द औरत काले कपडे पहन के दुःख का इज़हार करते हैं |इमामबाड़े सज जाते हैं फर्श ऐ अजा बिछ जाती है और दस दिनों के लिए मजलिस शुरू हो जाते है| कल से शहर के किसी ना किसी इलाके से जुलुस ऐ अलम और ताज़ा नुक्लेगा जिसमे हज़ारों की तादात में मुसलमान हिन्दू शरीक होते हैं इमाम हुसैन (अ.स) और उनके परिवार की कुर्बानियों को नौहे और गिरया कर के याद करते और आंसू बहाते और मातम करते हैं |
बाज़ार भुआ स्थित शेंख इस्लाम का चौक पे मुहर्रम का चाँद देखने के लिए मुसलमान दुःख का इज़हार करते काले कपड़ों में अलम हजरत अब्बास सजा के खड़े रहते हैं और चाँद देखते ही यह अलम इमामबाड़ा मीर भर की तरफ जाता है फिर वहाँ से इमाम बड़ा दल्लान होता हुआ जौनपुर के अन्य इमामबाड़ों में अजादारों के सामने इमाम हुसैन (अ.स) की शहादत को याद करता या हुसैन या हुसैन की सदा बुलंद करता घूमता है |
इस्लाम के चौक में ग़म ऐ हुसैन में अपना सुहाग बढाया शिया महिलाओं ने |


