जौनपुर के कटघरा जाने वाली सड़क पे एक क़दीमी इमामबाड़ा जिसे आज बड़े इमाम का इमामबाड़ा कहते हैं मौजूद है |यह इमामबाड़ा मोहम्मद शाह देहली ने ...
जौनपुर के कटघरा जाने वाली सड़क पे एक क़दीमी इमामबाड़ा जिसे आज बड़े इमाम का इमामबाड़ा कहते हैं मौजूद है |यह इमामबाड़ा मोहम्मद शाह देहली ने ११८६ में तामील करवाया था |
आज इस इमामबाड़े की देख रेखा जनाब जीशान साहब करते हैं | यहाँ 9 मुहर्रम को एक बहुत बड़ी तुर्बत बनायी जाती है जिसे बनाने में ३ दिन लगता है | ऐसे तुर्बत जौनपुर में और कहीं देखने को नहीं मिलती |
इस इमामबाड़े से मुहर्रम की पहली नौचंदी को एक जुलुस निकलता है जो पंजे शरीफ जाता है | यहाँ से 5 मुहर्रम को एक जलूस ऐ अज़ादारी निकलता है जो कल्लू के इमामबाड़े तक जाता है |
9 मुहर्रम को भी एक जुलुस निकलता है जो ओलन्दगंज होता हुआ वापस यही आ के रखा जाता है और 10 मुहर्रम को कटघरे में नदी किनारे जीशान साहब के अबा ओ अजदाद की दफ्नगाह में दफन होता है |



