हजरत अली के शहादत पर अजमेरी में स्थित मस्जिद शाह अता हुसैन में अंजुमने जुल्फेकारिया के बैनर तले मजलिस का आयोजन हुआ जहां मजलिस से पहले नम...
हजरत अली के शहादत पर अजमेरी में स्थित मस्जिद शाह अता हुसैन में अंजुमने जुल्फेकारिया के बैनर तले मजलिस का आयोजन हुआ जहां मजलिस से पहले नमाजे जोहरैन जमात से अदा की गयी। तत्पश्चात् मोहम्मद अब्बास काजमी ने सोजखानी किया जिसके बाद मौलाना सैयद सफदर हुसैन जैदी ने कहा कि हजरत अली का पूरा जीवन गरीबों, यतीमों, विधवाओं के प्रति समर्पित था। हजरत अली ने इस्लाम की रक्षा हेतु अपना सर्वत्र न्यौछावर कर दिया। इसके बाद जुलूसे अलम व ताजिया निकाला गया जो नवाब युसूफ पर पहुंचा तो वहां तकरीर हुई जहां से जुलूस अंजुमन कौसरिया रिजवी खां के हमराह आगे बढ़े। कोतवाली चैराहे से अंजुमन जाफरी ने मातम करना शुरू किया जिसके बाद दूसरी तकरीर चहारसू पर हुई जहां से बलुआघाट के इमामबाड़ा मद्दू से अंजुमन हुसैनिया के हमराह जुलूस निकाले जो किले के पास पहुंचकर समाप्त हो गया। इसके पहले चहारसू चैराहे पर सैयद मोहम्मद हसन प्रधानाचार्य शिया इण्टर कालेज एवं अध्यक्ष अजादारी कौंसिल ने तकरीर करते हुये कहा कि हजरत अली ने ऐसी न्याय व्यवस्था अपने शासनकाल में बनायी जो आज भी मिसाल के तौर पर प्रस्तुत की जाती है।



