मौला अली (अ.स) को १९ रमज़ान नमाज़ ऐ सुबह में इबने मुलजिम ने ज़रबत लगायी जिससे मौला अली (अ.स) की २१ रमज़ान को शहादत हो गयी | मौला अली (अ.स) ...
मौला अली (अ.स) को १९ रमज़ान नमाज़ ऐ सुबह में इबने मुलजिम ने ज़रबत लगायी जिससे मौला अली (अ.स) की २१ रमज़ान को शहादत हो गयी |मौला अली (अ.स) को ज़रबत लगने के बाद उन्हें यकीन हो गया था की वो अब नहीं बचेंगे उस वक़्त उन्होंने वसीयत की जिसे ध्यान से पढना चाहिए |
१) मैं तुम दोनों (दोनों बेटे हसन और हुसैन )को ,अपने तमाम अहल ओ अयाल को और जहाँ तक भी मेरा पैग़ाम पहुँचता है उस सभी को वसीयत करता हूँ तक्वा ऐ इलाही अख्तियार करें | अपने कामो को मुनज्ज़म (set) रखो ,आपस में ताल्लुकात को हमेशा सुधारे रहना क्यूँ की मैंने तुम्हारे नाना हज़रत मुहम्मद (स.अ.व) से सुना है की आपस के तालुकात सुधारे रखना आम नमाज़ और रोज़े से बेहतर है |
२) यतीमो के बारे में अल्लाह से डरते रहना उनको कभी भूखे रहने की नौबत ना आये और वो तुमारी निगाह के सामने बर्बाद ना हो जायें |
३) पड़ोसियों के बारे में अल्लाह से डरते रहना उनके बारे में पैगम्बर की वसीयत है और आप बराबर उनके हुकूक के बारे में नसीहत करते रहते थे की मुझे ऐसा लगता था कि आप उनको अपनी विरासत में भी शामिल कर सकते हैं |
४) कुरान पे अमल करना कहीं ऐसा ना हो की दुसरे लोग कुरान पे अमल के मामले में तुमसे आगे निकल जायें |
५) नमाज़ के बारे में अल्लाह से दरो क्यूँ की नमाज़ दीं का सुतून है |
६) अल्लाह के घर (मस्जिद) के बारे में अल्लाह से डरो और जब तक जिंदा रहना उसे खाली ना होने देना |
७) अपने जान माल और ज़बान से जिहाद करने के बारे में अल्लाह से दरो |
८) आपस में एक दुसरे से अच्छे ताल्लुकात रखना ,एक दुसरे की मदद करते रहना ,और खबरदार एक दुसरे से मुह ना फिराना |
९) रिश्तेदारों से ताल्लुकात न तोडना | नेकी की हिदायत और बुराई से रोकना तर्क ना करना और अगर तर्क करोगे तो तुम पे फसाद फैलाने वालों की हुकूमत हो जाएगी और तुम फरयाद करते रहोगे कोई सुनने वाला ना होगा |
१०) ऐ अब्दुल मुत्तलिब के बेटों अमीरुल मोमिनीन क़त्ल हो गए के नारे पे तुम मुसलमानों का खून ना बहाना और खबरदार मेरे क़त्ल के बाद मेरे कातिल के अलावा किसी को क़त्ल नहीं किया जा सकता | देखो अगर मैं इस ज़रबत से दुनिया से चला गया तो एक ज़रबत का जवाब सिर्फ एक ज़रबत ही है |
११) देखो मेरे कातिल के जिस्म के टुकड़े टुकड़े ना करना इसलिए की मैंने हज़रात मुहम्मद (स अव ) से सुना है की काटने वाले कुत्ते के भी हाथ पैर ना काटो |
तर्जुमा मौलाना स्य्यद सफ़दर हुसैन जैदी जौनपुर



