शोला जौनपुरी के नाम से हर जौनपुर निवासी वाकिफ है | इस नाम को आज किसी तार्रुफ कि आवश्यकता नहीं है. शहीद अली उर्फ शोला जौनपुरी का जन्म ...
शोला जौनपुरी के नाम से हर जौनपुर निवासी वाकिफ है | इस नाम को आज किसी तार्रुफ कि आवश्यकता नहीं है. शहीद अली उर्फ शोला जौनपुरी का जन्म जौनपुर मैं सन १९५० में हुआ था. इनके पिता अली रज़ा साहब भी एक मशहूर शायर थे | शोला जौनपुरी साहब ५ भाई हैं. बड़े भाई मुनीर हसन थे उर्फ बर्क जौनपुरी एक मशहूर शायर थे. आज भी बर्क जौनपुरी मार्ग उनकी शोहरत का गवाह है |
जनाब शोला जौनपुरी साहब ने उर्दू में M.A किया उसके बाद B.ed किया | इस समय
एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल के पद पे काम कर रहे हैं. शिला जौनपुरी
साहब को अपने वालिद और भाई कि ही तरह किसी शोहरत का कोई शौक नहीं लेकिन इस
बात माँ मलाल भी रहता है कि यह सर ज़मीन इ जौनपुर अपने बुजुर्गों के अच्छे
कामो को जल्द भुला दिया करती है | ऐसा शायद इस कारण है कि जौनपुर में एक से
एक प्रतिभाशाली लोग गुज़रे हैं लेकिन उने काम दुनिया तक नहीं पहुच सके और
अब ऐसा महसूस होता है कि उन्हें लोगों ने भुला दिया जबकि ऐसा नहीं है| इल्म
कभी मरता नहीं और नेकी कभी जाया नहीं जाती |
मज़हबी माहौल में पाले बढे शोला जौनपुरी साहब ने पहला शेर ही कर्बला मैं इमाम हुसैन के बेटे अली अकबर कि शहादत पे कहा.
उलझी हुई अकबर के कलेजे में सिना है
लैला कि निगाहों में क़यामत का समां है.
इसकी पह्ली किताब “आफ़्कारे शोला” इरान कुम से प्रकाशित हुई | इसके
शागिर्द और चाहने वाले इरान तक फैले हुए हैं. जनाब रजा बिस्वानी ,सलमान
कलापुरी, नजमी जौनपुरी, अदीब जौनपुरी, अनवर जौनपुरी, डॉ. शोहरत जौनपुरी
इत्यादि कुछ मशहूर नाम भी शोला साहब के शागिर्द हैं |
जल्द ही आप सभी के सामने इनकी ३ और किताबें और मंजर इ आम पे आ जाएंगी.
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पेश है जनाब शोला जौनपुर का यह साक्षात्कार जिसे आप बार बार सुनना चाहेंगे|


