शब् ऐ आशूर मौला हुसैन (अ.स) को चाहने वाले रात भर इबादतों में गुज़ारा करते हैं | तिलावत ऐ कुरान के साथ साथ जियारत कर्बला के शईदों की करते...
शब् ऐ आशूर मौला हुसैन (अ.स) को चाहने वाले रात भर इबादतों में गुज़ारा करते हैं | तिलावत ऐ कुरान के साथ साथ जियारत कर्बला के शईदों की करते हैं | नंगे पैर ,आस्तीन चढ़ी ,चाक गरीबां ,ग़म के काले कपडे पहने ये शहर के हर रौज़े और इमामबाड़ों की जियारत करते नज़र आया करते हैं |
घरों में लोग गद्दे और दरियों में नहीं लेटते बल्कि पुआल और इमामबाड़ों के फर्श पे ही अपनी थकान उतारते नज़र आते हैं | पलंग उलट दी जाती थी कभी लेकिन आज कम ही घरों में ऐसा देखने को मिलता है | वक़्त के साथ साथ अब तरीके भी बदलने लगे हैं लोग अब नंगे पैर कम नज़र आते हैं, कपड़ों से भी ग़म अब कुछ ही लोगों के झलकता है |रात का जागना भी कम होता जा रहा है |
लेकिन इन सब के साथ साथ अज़ादारी में कोई कमी नज़र नहीं आती और रात भर आज भी जायरीन गश्त किया करते हैं | इस बार मैंने भी सोंचा चलो मैं भी जौनपुर शहर में शब् ऐ आशूर जियारत करूँ रोजों की और उन मोमिनीन के रखे ताजिये की जिन्हें वो इस शब् रखते हैं और आशूर के रोज़ सदर इमामबाडा जा के दफन किया करते हैं |
जौनपुर शहर में जगह जगह इमामबाड़ों और चौक बने हुए हैं जिनपे रात भर लोगों का आना जाना इस शब् लगा रहता है | इसके साथ साथ ज़्यादातर शियाऔर अहले सुन्नत अपने घरों के दरवाज़े पे एक ताजिया रखते हैं जिनकी जियारत रात भाई लोग अकीदत से किया करते हैं | आने वालों को बहुत सी जगहों पे चाय ,पानी का इंतज़ाम भी हुआ करता है |
जियारत हर हाल में जियारत हुआ करती है लेकिन जितनी मुहब्बत और ख़ुशी मैंने उनके चेहरे पे पायी जिन्हें समाज गरीब कहता है जब मैं उनके घर एक छोटे से रखे ताजिये की जियारत को शब् ऐ आशूर गया उनकी ख़ुशी कहीं नहीं मिली |
यकीन हैं मुझे की अल्लाह उन ग़रीब कहे जाने वाले दिल के अमीरों की मुहब्बत हुसैन से ज़रूर कुबूल करता होगा |
| ज़री हजरत मुहम्मद (स.अ.व) कल्लू का इमामबाडा |
| चाहार्सू पे रखे ताजिये तुर्बत और वहाँ बैठे रात भर गिरया करते मोमिनीन |
| तुर्बत बड़े इमाम जौनपुर |
| मुहब्बत ऐ हुसैन दौलत की मुहताज नहीं . |
| सोनी टोला ..खुलूस और मुहब्बत |
| कल्लू मरहूम का इमामबाड़ा |


