ज्ञान जी बड़े एहतेमाम से अज़ादारी का इंतज़ाम करते हुए हर साल की तरह इस साल भी ग्यारह मुहर्रम को ग्यान कुमार जी ने बडी मुहब्बत से फोन कर के...
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| ज्ञान जी बड़े एहतेमाम से अज़ादारी का इंतज़ाम करते हुए |
हर साल की तरह इस साल भी ग्यारह मुहर्रम को ग्यान कुमार जी ने बडी मुहब्बत से फोन कर के बुलाया की हमारे यहा मौला हुसैन का ताबूत निकलेगा और मजलिस का एह्तेमाम किया गया आप जरूर आये और केवल इतना ही नही जब मुझे जाने मे कुछ परेशानी आयी तो उन्होने अपने बेटे जयंत को भेज दिया मुझे लेने के लिये |
ग्राम सुल्तानपुर दरवेश अली पो० मुरादगंज जौनपुर के रहने वाले ज्ञान कुमार जी पंजाब नेशनल बँक मे प्रबंधक के पद पे काम करते हैं और इमाम हुसैन के पिता इमाम अली के मुरीद हैं । कत्ले हुसेन असलम में मरगे यजीद है, इस्लाम जिन्दा होता है हर कर्बला के बाद। उक्त बातंे इराक से आये मौलाना सैयद रजा अब्बास दायम ने एक मजलिस में कही। इसके बाद अलम व शबीह जुलजनाह बरामद हुआ जो फिरोज मरहूम के घर से होता हुआ सरफराज बेग, सुल्तान बेग के दरवाजे से होता हुआ बैंककर्मी ज्ञान कुमार के दरवाजे पर पहुंचा जहां तमाम अंजुमनों ने नौहा व मातम किया। जुलूस के मुख्य आयोजक बैंककर्मी श्री कुमार व उनका पूरा परिवार रहा जहां हिन्दू-मुस्लिम का अद्भुत सौहार्द देखने को मिला। जुलूस में मनोज, जयंत कुमार व ऋषि कुमार ने छूरे का मातम किया।
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| गेट पे लिखी ज्ञान जी के दिल की बात | |