जब मुहर्रम आता है
इमाम हुसैन (अ.स) का ग़म जौनपुर में बड़े जोश से मनाया जाता है जिसमे हिन्दू मुसलमान शिया सुन्नी सभी शामिल हुआ करते हैं | मुसलमानों ने पहली मुहर्रम को जो ताजिया सजाया था उसे तो 10 मुहर्रम जिसे आशूरा भी कहते हैं ,के दिन दफन कर दिया जाता है लेकिन दो महीने आठ दिन तक यह इमाम हुसैन का दुःख मनाया जाता है | इन दिनों में मुसलमान काले कपडे पहने दुनिया के हर देश की तरह जौनपुर में भी नज़र आयेगे| जगह जहग शब्बेदारी, जुलुस अज़ादारी ,मजलिस का सिलसिला इन दो महीने आठ दिन तक चलता रहता है जिसमे बहुत से ख़ास दिन जैसे आशूरा, इमाम का दसवां, चौबीसवां,चालीसवां,28 सफ़र इत्यादि ख़ास होते हैं |
जौनपुर की अज़ादारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए जौनपुर अज़ादारी की वेबसाईट पे आप जा के जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |
इस साल कोरोना की वजह से सड़कों पे जुलुस वगैरह की इजाज़त नहीं मिली जिसका अफ़सोस पूरी क़ौम को रहेगा | इस्लाम में भी जान पे खेल के कोई भी इबादत अंजाम देने की मनाही है और अगर कोई बीमारी है तो उस से बचने के तरीकों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता |
ग़म ऐ हुसैन तो हम मनाएंगे अज़ादारी होगी लेकिन एहतियात के साथ और जो प्रशासन की तरफ से गाइड लाइन दी गयी है उसपे अमल करते हुए | मजलिस में मसाएब ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ा जाय जिस से हुसैनियों को यह ग़म न रही की जुलिस ऐ अज़ा की कमी की वजह से हम जी भर के रो भी न सके |
इमाम हुसैन (अ.स) की शक्सियत किसी धर्म की जागीर नहीं बल्कि इमाम हुसैन (अ.स) सभी इंसानों के दिलों पे राज करते हैं|
चलिए देखते हैं इस मुहर्रम की कुछ झलकियाँ |
इमाम हुसैन (अ.स) की शक्सियत किसी धर्म की जागीर नहीं बल्कि इमाम हुसैन (अ.स) सभी इंसानों के दिलों पे राज करते हैं|
चलिए देखते हैं इस मुहर्रम की कुछ झलकियाँ |
| Chaand Raat |
| ज़ुल्जिनाह जिसने वफादारी की मिसाल कर्बला में कायम की | |




