इमामबाड़ा छ्त्रीघाट और इमामबाड़ा दालान के बाद जिस इमाबादे का ज़िक्र आता है वो है बेगम गंज में बना सदर इमाबाडा जौनपुर जो आज भी जौन...
इमामबाड़ा छ्त्रीघाट और इमामबाड़ा दालान के बाद जिस इमाबादे का ज़िक्र आता है वो है बेगम गंज में बना सदर इमाबाडा जौनपुर जो आज भी जौनपुर के शियों का एक मरकज़ है|
इब्राहीम शाह शार्की (१४००-१४४०) के बेटे महमूद शाह शार्की (१४४०-१४५७) ने बेगम गंज में एक बेहद खूबसूरत इमामबाडा बनवाया जिसके ज़्यादातर हिस्सों को इब्राहीम लोधी (1517) ने तुडवा दिया था | आज इस इमामबाड़े को सदर इमामबाडा के नाम से जाना जाता है |
Ref: IBID pg 22 , जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शोधकर्ता डॉ सय्यद मुहम्मद आमिर History of azadaari and Muharram in Jaunpur
महमूद शाह शार्की के समय में एक अजीमुशान अज़ाखाना बेगम गंज में बनवाया गया जिसे सिकंदर लोधी ने ध्वस्त कर दिया था लेकिन यह इमामबाड़ा धीरे धीरे बनता रहा और आज इस इमामबाड़े को "सदर इमामबाड़ा " कहा जाता है | Ref :शीराज़े हिन्द की अज़ादारी लेखक-डॉ0 सैयद मशीयत हुसैन रिज़वी,
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| जो हिस्सा बचा था वो पुरानी तस्वीर में दिख रहा है |
दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह के शासन काल में राजा शेख हाशिम अली मछली शहर के पूर्वज शेख फतह मुहम्मद उर्फ़ मंगली मंगली मियाँ जौनपुर जो इलाहबाद में प्रबंधक सैनिक अधिकारी थे । उस समय जौनपुर इलाहाबाद के अधीन था । मंगली मियाँ बड़े ही धनवान और प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से थे । उसी समय इन्होने गोमती किनारे इसकी नीव डाली ।

इमामबाड़े में भीतर इमाम हुसैन का ,हज़रत अब्बास का रौज़ा और क़दम ऐ रसूल है । इसकी तामीर फिर से बड़े पैमाने पे १८७८ में हुयी |
इसके फाटक पे लखनऊ के मशहूर शायर नफीस का शेर लिखा है जो २०१६ की रिपेयरिंग में ख़त्म हो गया ।
ऐ जाहे कर्बला पाख इमाम ,या करो गिरया फ़र्ज़ ऍन यह है|
यह जो इसमें इमामबाड़ा है।,जाय फरियादी शोरो शॉन यह है|
बाद जिसका हुआ है नौ तामीर ,मोमिनो के दिलों का चैन यह है|
है बजा कहिये गर डरे फ़िरदौस बाग़ ऐ जन्नत का जेब औ जीन यह है|
साल ऐ तारिख कई नफीस हज़ी ख़ानए मातम ऐ हुसैन यह है (१२९५ हिजरी)
Ref: Jaaunpur Nama






