मौलाना सफ़दर साहब लखनऊ पथ्थर वाली मस्जिद में मरहूम सैयेद हसन मेहदी अबिदी साहब (ज़फरबाद ) की पंज...

मौलाना सफ़दर साहब लखनऊ पथ्थर वाली मस्जिद में मरहूम सैयेद हसन मेहदी अबिदी साहब (ज़फरबाद ) की पंजुम की मजलिस को खिलाब करते हुए |
मौलाना ने बताया की लोग समझते हैं कि कोई गरीब अगर इन्तेकाल कर जाय तो उसके कफ़न दफ़न का इंतज़ाम करना मुसलमानों पे फ़र्ज़ है और सवाब का काम है और लोग सही भी समझते है लेकिन अगर आपने किसी ग़रीब की ज़िन्दगी में उसकी मदद नहीं की , बीमार का इलाज नहीं करवाया और उसी गरीब के इन्तेकाल कर जाने पे उसके कफ़न दफ़न का इंतज़ाम करने उठे तो इसका कोई सवाब नहीं होगा |
किसी गरीब को ज़िंदगी देने की कोशिश उसकी मौत के बाद उसके कफ़न दफ़न के इंतज़ाम करने से बेहतर है |
|..मौलाना सफ़दर जैदी
किसी शायर भी कुछ ऐसा ही कहा है :-
जिंदगी में कोई दो मिनट मेरे पास ना बैठा, आज सब मेरे पास बैठे जा रहे थे.
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जिंदगी में कोई तौफा ना मिला आज तक., और आज सब फूल-ही -फूल दिये जा रहे थे
जिंदगी में तरस गये थे हम किसी एक हाथ के लिये., और आज कंधे पे कंधे दिये जा रहे थे.
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जिंदगी में दो कदम साथ चलने को तैयार न था कोई, और आज काफ़िला बन साथ चले जा रहे थे
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जिंदगी में आज पता चला मुझे कि "मौत" कितनी हसीन होती है,कम्बख्त. . .
हम तो यूँ ही'जिंदगी' जीये जा रहे थे..



