एस एम् मासूम ने दाख्खिन पट्टी रन्नो में मजलिस में कहा दुनिया का हर इंसान हमारा भाई है यही है इस्लाम का पैगाम | माह ऐ मुहर्रम आते ही ...
एस एम् मासूम ने दाख्खिन पट्टी रन्नो में मजलिस में कहा दुनिया का हर इंसान हमारा भाई है यही है इस्लाम का पैगाम |
माह ऐ मुहर्रम आते ही दुनिया भर के मुसलमान पैगम्बर ऐ इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.अ व ) के नवासे हुसैन को याद करके आंसू बनाते हैं | यह हुसैन मुसलमानो के खलीफा हज़रत अली के बेटे भी थे | उस दौर में मुसलमान ऐसे गुमराह होने लगे थे की अपने ही नबी हज़रत मुहम्मद (स.अ व ) ने नवासे और अपने ही खलीफा के बेटे हुसैन और उनके परिवार के क़त्ल के लिए राज़ी नज़र आ रहे थे और जो हुसैन के साथी थे उनमे से कुछ इब्ने ज़ियाद के खौफ से कुछ लालच से चुप बैठ गए और कुछ इमाम हुसैन के साथ रहे | दो महर्रम को हुसैन अपने साथियों परिवार वालों और बच्चो के साथ कर्बला पहुंचे जहां पांच मुहर्रम को उनके खेमे दरया से हटा दिए गए और सात मुहर्रम से पानी ख़त्म होने लगा | दस मुहर्रम आते आते पूरे परिवार की प्यास से हालत खराब होने लगी लेकिन हुसैन ने सब्र किया और हार नहीं मानी क्यों की हुसैन जानते थे की अगर उन्होंने हार मान के समझौता कर लिया तो जो इस्लाम अमन का पैगाम देता है उस इस्लाम की पहचान ज़ुल्म बन जायगा | उन्होंने बताया की समाज में दो तरह के लोग होते हैं एक आपका धर्म भाई और दूसरा इंसानियत के रिश्ते से भाई लेकिन मुसलमान हर एक पे रहम करता है और अगर कोई कुछ गलत कह दे तो भी माफ़ करता है यही पैगाम हमें इमाम हुसैन के बाबा हज़रात अली अस ने दिया था |
तीसरी मुहर्रम को दाख्खिन पट्टी रन्नो के इमामबारगाह में मजलिस हुई जिसके बाद तुर्बत हज़रत अब्बास अलमदार और आलम बरामद हुआ साथ में थे नौहा करती अंजुमनें और तबल | इस मजलिस में सोज़ख़्वानी पेश की गए और मजलिस को ज़ाकिरे अहलेबैत सय्यद मोहम्मद मासूम साहब ने खेताब किया जिसमें उन्होंने कहा की इमाम हुसैन अ0स0 की शहादत इंसानियत का पैगाम देती है इस्लाम में किसी भी धर्म की आस्था को ठेस पहुंचाने की इजाज़त नहीं |
इस मोहर्रम के महीने में आज से 1379 साल पहले पैगम्बर हज़रत मोहम्मद स0व0 के नवासे को भूका प्यासा बेदर्दी के साथ कर्बला में शहीद कर दिया गया जिसकी याद में हर साल मोहर्रम के महीने में सारी दुनिया के मुसलमान शोक मनाते है और इमाम हुसैन अ0स0 को याद करके आसूं बहाते है और इन आसुओं से इंसानियत का पैगाम देते है इसके बाद उन्होंने कर्बला में हुसैन अ0स0 के ऊपर हुए ज़ुल्म को बयान किया जिसको सुनकर सभी मुसलमान रोते हुए मातम कर रहे थे |
और इसी बीच हज़रत अब्बास अ0स0 का अलम और तुर्बत हज़रत अब्बास अलमदार का ताबूत बरामद हुआ और अंजुमनें नौहा मातम करती रही |




