ग़म में डूबा माह ऐ मुहर्रम का चाँद हुआ नमूदार ,अज़ादारों की आँखे हुयी नम | । चाँद दिखते ही अज़ादारो कि आंखे नम हो गयी । चारो तरफ से या हुसैन या...
ग़म में डूबा माह ऐ मुहर्रम का चाँद हुआ नमूदार ,अज़ादारों की आँखे हुयी नम | । चाँद दिखते ही अज़ादारो कि आंखे नम हो गयी । चारो तरफ से या हुसैन या हुसैन की मातमी सदा गुजने लगी । अज़ादारो ने अपने घरों में अज़ाखाना सजा कर मजलिस मातम करने में जुट गए ।

Falak per chand moharrum ka dekh ker Wamiq,Khushi yeh hai ki shaheedon ke gham me roenge.



