मजलिस क्या है ? मुहर्रम आते ही पूरी दुनिया में पैगम्बर ऐ इस्लाम के नवासे इमाम हुसैन के चाहने वाले इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि देने के लिए उ...

मजलिस क्या है ?
मुहर्रम आते ही पूरी दुनिया में पैगम्बर ऐ इस्लाम के नवासे इमाम हुसैन के चाहने वाले इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी शहादत को याद करने के लिए अपने घरों में इमामबाड़ों में अलम ,ताज़िया , सजा देते है और जगह जगह मजलिसें करते और इमाम हुसैन पे उस दौर के आतंकवादी , विश्व विजय का शौक़ रखने वाले यज़ीद के ज़ुल्म को याद करके आंसू बहाते हैं |
इस प्रकार अगर आसान भाषा में समझा जाय तो इन मजलिसों को आप शोक सभा भी कह सकते हैं | इन मजलिसों में एक धर्म गुरु या ज़ाकिर (कर्बला के वाक़ए का जानकार ) होता है जिसको ख़ास तौर से शोक सभा करने वाला बुलाता है ,वो मिम्बर पे बैठ के कर्बला में इमाम हुसैन और उनके परिवार पे हुए ज़ुल्म और उनकी शहादत को बायां करता है और हुसैन के चाहने वाले सामने बैठ के आंसू बहाते हैं |
1400 से अधिक सालों से यह सिलसिला चला आ रहा जो हुसैन के चाहने वालों को यह सिखाता रहता है की ज़ुल्म का धर्म से कोई रिश्ता नहीं और इंसानियत ही असल धर्म है और जो इस उसूल को मानता है वही सच्चा मुसलमान कहलाता है |

मजलिस कल्लू का इमामबाड़ा जौनपुर 1965

मजलिस "रन्नो जौनपुर "


