जानिए ताज़िया क्या है और कब उठता है ? मुहर्रम का चाँद होते ही पूरे देश में हर चौक इमामबाड़ों और घरों में इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि देने के लि...
जानिए ताज़िया क्या है और कब उठता है ?
मुहर्रम का चाँद होते ही पूरे देश में हर चौक इमामबाड़ों और घरों में इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी शहादत को याद करने के लिए ताज़िया रखा जाता है | ताज़िया क्या है इसे समझने के लिए इस बात समझना आवश्यक है की मुहर्रम का चाँद होते ही हर हुसैन का चाहने वाला कर्बला इमाम हुसैन जहाँ दफन हैं वहां जाना चाहता है और जब वो नहीं जा पाता तो वो जहाँ रहता है वहीँ पे इमाम हुसैन के रौज़े की नक़ल बना के चौक और इमामबाड़ों में रखता है और इमाम हुसैन हुसैन की शहादत को याद करता है |
ताज़िये के अंदर इमाम हुसैन की क़ब्र बनी होती है और यह ताज़िया मुहर्रम का चाँद होते ही रखा जाता है और दस मुहर्रम को अपने अपने इलाक़े की कर्बला में वैसे ही दफ़्न कर दिया जाता है जैसे की घरों से किसी अपने को उसके इंतेक़ाल के बाद दफन किया जाता है |
यह ताज़ियादारी हर मुसलमान करता है और ताज़िये का अकार इलाक़ाई लोगों की पसंद के अनुसार हुआ करता है | ताजियादारी हकीकत में कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि देने का एक तरीका है और ताज़िया इमाम हुसैन की क़ब्र और रौज़े की नक़ल |



