दुनिया का हर मानवता का पुजारी इमाम हुसैन पे कर्बला में हुए ज़ुल्म को सुन के दुखी होता है | कर्बला में जब पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (स) के नाती इमा...
क्या तमाशा हुआ इस्लाम की तक़दीर के साथ |
क़त्ल ऐ शब्बीर हुआ नारा ऐ तदबीर के साथ |
अल्लामा इक़बाल
शब्बीर = इमाम हुसैन , नारा ऐ तदबीर = अल्लाह हो अकबर
कर्बला में जब पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (स) के नाती इमाम हुसैन ( शब्बीर ) को यज़ीदी लश्कर ने शहीद किया तो इस ज़ुल्म की कहानी पूरी दुनिया में फैली जो इतनी दर्दनाक थी की हर क़ौम पूरी दुनिया की दुःख प्रकट करने लगी |
देखिये किशन लाल जी ने इस बात को कैसे समझाया है|
देखिये किशन लाल जी ने इस बात को कैसे समझाया है|
": मैं हिन्दू हो के भी दुश्मन नहीं हूँ ,नबी की आल को शिकवा नहीं है
मेरे माथे की सुर्खी पे ना जाओ ,तिलक है खून का धब्बा नहीं है |"
और शायर अहमद सरोष ने एक नौहा लिखा जिसे सीतापुर के किशन लाला “किशन" हमेशा पढ़ते थे
भारत में अगर आजाता, ह्रदय में उतारा जाता
यों चाँद बनी हाशिम का धोखे से न मारा जाता
यूं मश्क़ न छेदी जाती, यूं हलक़ न काटा जाता
यूं जल की खातिर रन में, अकबर को न मारा जाता
चौखट से न उठते माथे, हर और से पूजा होती
इस देश की भाषाओं में, भगवान् पुकारा जाता
ज़हरा का चंद्रमा रन में , अंधियारा न होने देता
प्यासों का स्वागत करने , जमना का किनारा जाता |



