अफ़सोस अद अफ़सोस मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष और इस्लामिक स्कॉलर मौलाना डाक्टर कल्बे सादिक़ साहब अब हमारे बीच में नहीं रहे और ऐसा खाली...
अफ़सोस अद अफ़सोस मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष और इस्लामिक स्कॉलर मौलाना डाक्टर कल्बे सादिक़ साहब अब हमारे बीच में नहीं रहे और ऐसा खालीपन छोड़ गए जिसे भरना आसान नहीं | मौलाना डाक्टर कल्बे सादिक़ साहब* हिंदुस्तान के मशहूर इल्मी मज़हबी खानदान *खानदान ए इज्तेहाद* के मशहूर मारूफ आलिम थे और क़ौम को हमेशा जेहालत और अशिक्षा के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए अवाम को प्रेरित करते रहे | वे हिन्दू मुस्लिम व शिया सुन्नी इत्तेहाद के लिये हमेशा याद किये जायेंगे |
मौलाना डाक्टर कल्बे सादिक़ साहब* हिंदुस्तान के मशहूर इल्मी मज़हबी खानदान *खानदान ए इज्तेहाद* के मशहूर मारूफ आलिम हैं जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी मिल्लत की तालीमी पसमन्दगी दूर करने के लिए वक़्फ़ कर दी । हर तक़रीर और हर मजलिस में जेहालत और अशिक्षा के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए अवाम को प्रेरित करते
सिर्फ़ ज़बान से तबलीग़ नहीं की बल्कि अमली तौर पर ख़िदमत करके नज़ीर क़ायम की । 1984 में तौहीदुल मुस्लेमीन ट्रस्ट TMT क़ायम किया जिसकी मदद से न जाने कितने बच्चे बच्चियां पढ़ कर कामयाब ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं । लखनऊ में अंग्रेज़ी मीडियम यूनिटी कालेज क़ायम किया और सेकेंड शिफ्ट में बिल्कुल मुफ्त तालीम के लिये मिशन स्कूल बनाया । अलीगढ़ में MU कॉलेज की तामीर कराई । टेक्निकल कोर्सेज के लिये इंडस्ट्रियल स्कूल बनाया और लखनऊ के काज़मैन में चैरिटेबल अस्पताल क़ायम किया
इमामबाड़े गुफरान माब की जो आज खूबसूरत बिल्डिंग दिखाई दे रही है ये भी जनाब की मेहनतों का नतीजा है और उसी कैम्पस में रोशनी हॉस्टल बनवाया ।दुनिया भर में ख़ास पहचान बनाई और हिन्दू मुस्लिम व शिया सुन्नी इत्तेहाद के लिये हमेशा कोशिश की और हर धर्म व फ़िरके में इज़्ज़त और शोहरत हासिल की ।सादगी , अख़लाक़ , ख़िदमत और लोगों के हमदर्द के तौर पर जाने जाते हैं मौलाना कल्बे सादिक़ साहब जो सबके साथ इत्तेहाद और मिल जुल कर क़ौम की तरक़्क़ी के लिये ज़िंदगी भर कोशिश करते रहे ।
ग़रीबो , बेवाओं और यतीमों के सरपरस्त और ख़ामोशी से उनके घर जा कर उनकी मदद करने वाले और अपने साथ बीमारों को गाड़ी में बिठा कर एरा ले जा कर उनका इलाज कराने वाला आज दुनिया में नहीं रहा |
मौलाना डाक्टर कल्बे सादिक़ साहब* हिंदुस्तान के मशहूर इल्मी मज़हबी खानदान *खानदान ए इज्तेहाद* के मशहूर मारूफ आलिम हैं जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी मिल्लत की तालीमी पसमन्दगी दूर करने के लिए वक़्फ़ कर दी । हर तक़रीर और हर मजलिस में जेहालत और अशिक्षा के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए अवाम को प्रेरित करते
सिर्फ़ ज़बान से तबलीग़ नहीं की बल्कि अमली तौर पर ख़िदमत करके नज़ीर क़ायम की । 1984 में तौहीदुल मुस्लेमीन ट्रस्ट TMT क़ायम किया जिसकी मदद से न जाने कितने बच्चे बच्चियां पढ़ कर कामयाब ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं । लखनऊ में अंग्रेज़ी मीडियम यूनिटी कालेज क़ायम किया और सेकेंड शिफ्ट में बिल्कुल मुफ्त तालीम के लिये मिशन स्कूल बनाया । अलीगढ़ में MU कॉलेज की तामीर कराई । टेक्निकल कोर्सेज के लिये इंडस्ट्रियल स्कूल बनाया और लखनऊ के काज़मैन में चैरिटेबल अस्पताल क़ायम किया
इमामबाड़े गुफरान माब की जो आज खूबसूरत बिल्डिंग दिखाई दे रही है ये भी जनाब की मेहनतों का नतीजा है और उसी कैम्पस में रोशनी हॉस्टल बनवाया ।दुनिया भर में ख़ास पहचान बनाई और हिन्दू मुस्लिम व शिया सुन्नी इत्तेहाद के लिये हमेशा कोशिश की और हर धर्म व फ़िरके में इज़्ज़त और शोहरत हासिल की ।सादगी , अख़लाक़ , ख़िदमत और लोगों के हमदर्द के तौर पर जाने जाते हैं मौलाना कल्बे सादिक़ साहब जो सबके साथ इत्तेहाद और मिल जुल कर क़ौम की तरक़्क़ी के लिये ज़िंदगी भर कोशिश करते रहे ।
ग़रीबो , बेवाओं और यतीमों के सरपरस्त और ख़ामोशी से उनके घर जा कर उनकी मदद करने वाले और अपने साथ बीमारों को गाड़ी में बिठा कर एरा ले जा कर उनका इलाज कराने वाला आज दुनिया में नहीं रहा |
मैंने अपनी ज़िन्दगी में मरहूम से बहुत कुछ सीखा और अब उनके बाद उनकी कमी ना क़ाबिल ऐ बर्दाश्त होगी | अल्लाह जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।



