बड़ी मुश्किल से मिलता है फ़कीरों को कोई गौहर, बता ऐ ख़ाक कैसे दफ़्न ये "हीरा" करे कोई।।। असलम नक़वी हर दिल अज़ीज़ हम सब के सुख दुः...
बड़ी मुश्किल से मिलता है फ़कीरों को कोई गौहर,बता ऐ ख़ाक कैसे दफ़्न ये "हीरा" करे कोई।।।असलम नक़वी
आज बाद ऐ मग़रिबैं उनकी तद्फीन सदर इमामबाड़े में हुयी | उनके जनाज़े में भारी संख्या में ज़िले के सभी सियासी पार्टियों के साथ साथ समाजसेवियों और उनके चाहने वालो ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दिया । मुस्लिम हीरा एक समाजसेवी थे और उनके निधन के समाचार मिलते ही सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव , प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व चेयरमैन मौलाना जावेद आब्दी , शिया धर्मगुरु मौलाना सफदर हुसैन ज़ैदी , पूर्व मंत्री डॉ केपी यादव , पूर्व एमएलसी सिराज मेहदी, सपा नेता अजय यादव ,सपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव , सोशल एक्टिविस्ट एसएम मासूम ,, शिया कालेज के प्रबंधक नजमुल हसन नजमी , तहसीन अब्बास सोनी ,सहित अनगिनत समाज सेवियों और नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए स्वर्गीय हीरा के बड़े भाई पत्रकार बिलाल जानी को पुरसा दिया ।
मोहम्मद मुस्लिम हीरा शिया जामा मस्जिद नवाब बाग़ जौनपुर इन्तेज़ामिया कमेटी के मेम्बर भी थे जामा मस्जिद के हर काम में पेश पेश रहते थे अल्लाह मरहूम की बतुफैले ख़त्मी मरतब्त हज़रत मुहम्मद मुस्तफा ( स .अ.व) और अहलैबैत (अ.स) मग़फेरत फरमाए और उनकी दुखियारी मां ,भाइयों बहन व दीगर अहले ख़ाना को सब्र ए जमील एनाएत फरमाए आमीन मरहूम के लिए सूर ए फातेहा की तेलावत की दरख्वास्त है ।
यह ऐसी शख्सियत थी जिसने दूसरों को बहुत कुछ दिला दिया बना दिया लेकिन खुद के लिए कभी किसी से कुछ नहीं माँगा |
एस एम् मासूम



