शाम ऐ गरीबा
ये आशूर १० मुहर्रम नमाज़ ऐ अस्र का वक़्त था जब इमाम हुसैन (अ.स ) भी शहीद हो चुके ,कर्बला की ज़मीन हिलने लगी, सूरज पे ग्रहण लगा और फुरात का पानी उछलने लगा ,उस वक़्त लुटे हुए काफिले के खेमो से ऐसी दर्दनाक आवाज़ें रोने की आ रही थीं की जिसे पहले कभी किसी ने नहीं सुना था । पैग़म्बर ऐ इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स अ व ) के घरो से ऐसी रोने की आवाज़ें इस से पहले कभी नहीं सुनी गयी थीं ।
यज़ीद के लश्कर ने पैग़म्बर ऐ इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स अ व ) के नवासे उनके दोस्तों उनके बेटो सभी को बेदर्दी से कर्बला के मैदान में शहीद किया और इमाम हुसैन का एक बेटा जो बीमार था या अल्लाह की मसलेहत से बच गया था खेमे में अपने ५ साल के बेटे मुहम्मद बाक़िर के साथ था ।
इमाम हुसैन (अ स ) की शहादत के बाद इब्ने ज़्याद ने हुक्म दिया उम्र इब्ने ज़ियाद को की सिर्फ सर काट लेने से तसल्ली नहीं मिलेगी हुसैन के लाशें को बागियों की तरफ पामाल घोड़ो से जाय और जैसे ही घोड़े दौड़े जनाब ऐ ज़ैनब निकल के आ गयी और हुसैन के पामाल लाशें के पास पहुँच के पहली मजलिस पढ़ी और मदीने का रुख कर के ऐ पैग़म्बर ऐ इस्लाम ऐ अल्लाह के नबी इस्लाम को बचाने के लिए दी गयी हुसैन की क़ुरबानी को क़ुबूल करे । कौन कहता है की मेरे भाई को कफ़न नहीं मिला आ के देखिये हुसैन को खाक ने कफन दिया ।
सूरज डूब रहा था और नवासा ऐ रसूल -हुसैन का खेमा जल रहा था दुश्मन हर खेमे को लूट रहा था और बीबियों के हिजाब छीन रहा था । ५ साल सकीना के कानो से गोशवारे खींच लिए गए और कानो को ज़ख़्मी कर दिया ,तमाचे मारे गए और सभी बीबियाँ खेमे से निकल के ऐसी भागी जैसे कोई तस्बीह टूट जाने पे दाने बिखर जाते हैं ।
एक बची जिसके कानो से खून बाह रहा था , गालों पे तमाचों के निशाँ था ,दामन में आग लगी हुयी थी सेहरा में भागती नज़र आयी । एक शख्स हउमैद बिन मुस्लिम कहता है की मैंने जब देखा तो पुछा कौन है और कहाँ जा रही है तो बच्ची ने कहा वो हुसैन की बेटी है और नजफ़ जा रही हैं अपने दादा अली इब्ने अबी तालिब से शिकायत करने की मेरा क्या हाल किया । उस शख्स ने सकीना को बीबी ज़ैनब के पास पहुंचा दिया ।
जब रात हो गयी तो बीबी जैिनब जले हुए खेमों के बीच सारे बीबियों और इमाम सज्जाद के बीच बैठी थीं और पहरा दे रही थी । उम्र साद ने हुर्र की बेवा को कहा की जाओ और इनको कुछ खाने पीने को दो । जब हुर्र की बीवी आई तो जनाब ऐ ज़ैनब ने आगे बढ़ के उसे उसके शौहर का पुरसा दिया और बिठाया । पानी जैसे ही मिला जनाब ऐ ज़ैनब दौड़ीं सकीना की तरफ जो रोते रोते बेहोश हो गयी थी । सकीना ने आँखें खोली और पूछा क्या चाचा अब्बास पानी ले आ गए ?
बीबी ज़ैनब ने कहा हुर्र की बेवा पानी लाई है तो सकीना ने पुछा फूफी आपने पानी क्यों नहीं पीया अभी तक तो ज़ैनब ने कहा तुम सबसे छोटी हो ,बस इतना सुन्ना था की सकीना के कहा नहीं मेरा भाई अली असगर सबसे छोटा है और पानी ले के मैदान ऐ जंग की तरफ भागी जहां अली असगर दफन था ।
ऐसी गुज़र रही थी बे वतनो की कर्बला में शाम जब न अब्बास थे , ना अली अकबर , ना क़ासिम , ना ऑन ना मुहम्मद ,ना असहाब ऐ हुसैन बस ग़म था और ज़ालिम दुशमन।
अचानक जनाब ऐ ज़ैनब की नज़र पडी की सकीना नहीं नज़र आ रही है और जब मैदान ऐ जंग में तलाश किया तो कहीं नज़र नहीं आई । तलाशते तलाशते जनाब ऐ ज़ैनब ने देखा सकीना इमाम हुसैन के लाशें से लिपटी सीने पे सो रही है ।


