मुहर्रम में लगने वाली " सबील " क्यों इमाम हुसैन के नाम पे लगाई जाती है ? 61 AH (10 October 680 AD) के दिन इराक़ के एक सुनसान इलाक़े ...
मुहर्रम में लगने वाली " सबील " क्यों इमाम हुसैन के नाम पे लगाई जाती है ?
इमाम हुसैन के चाहेने वाले पूरी दुनिया में मुहर्रम के दस दिन शोक मनाते हैं और सभी को हुसैन की प्यास को याद कर के पानी शरबत पिलाते हैं | पानी पिलाने के लिए इमामबाड़ों के सामने , अपने मोहल्ले में , "सबील" लगाते हैं और सड़कों पे घूम घूम के प्यासे मुसाफिरों को पानी और शर्बत पिलाते हैं |




