जानिये ताबूत और तुर्बत शोहदाय कर्बला के बारे में | माह ऐ मुहर्रम में इमामबाड़ों से अज़ादारी के जुलुस निकलते हैं जिसमे सबसे आगे अलम फिर ताज़िय...
जानिये ताबूत और तुर्बत शोहदाय कर्बला के बारे में |
माह ऐ मुहर्रम में इमामबाड़ों से अज़ादारी के जुलुस निकलते हैं जिसमे सबसे आगे अलम फिर ताज़िया ,ज़ुल्जिनाह तुर्बत, ताबूत ,झूला वगैरह हुआ करते हैं और अंजुमने नौहा करती आंसू बहती मातम करती हुसैन पे हुए ज़ुल्म को बयान करती चलती रहती है | बहुत से लोग इनका एहतेराम करते हैं ख़ास तौर पे दूसरे धर्म के लोग लेकिन यह नहीं समझ पाते की आखिर या निशानियां हैं क्या ? मैंने आसान शब्दों में कोशिश की की आप सभी को समझा सकूँ यह निशानियां क्या है ?
1442 साल पहले इराक के सुनसान इलाक़े कर्बला में हज़रत मुहम्मद (स ) के नवासे इमाम हुसैन को भूखा प्यासा शहीद कर दिया गया और उनके परिवार वालों पे ज़ुल्म करते उनको पैदल कर्बला से कूफ़ा और कूफ़ा से शाम जुलुस की तरह घुमाया गया और उस दौर के ज़ालिम बादशाह में ले जाय गया | यह ज़ुल्म इतना सख्त था की दुनिया भर से मुसलमान इसे सहन ना कर सके ,यहां तक की ईसाई और हिन्दू भी इस ज़ुल्म को सह ना सके और आंसू बहाने लगे |
तुर्बत 72 कर्बला के शहीदों की मीर घर इमामबाड़ा पानदरीबा जौनपुर
इमाम हुसैन के चाहने वाले इन जुलूसों के ज़रिये कर्बला के शहीदों को याद करते हैं और यह इमाम की मुहब्बत में ज़ाहिर करते हैं की हम अगर कर्बला में होते तो ऐसा न होने देते | या हुसैन अब्बास अलमदार के बाज़ू कटे और अलम गिर गया लेकिन हम इसे गिरने नहीं देंगे हमेशा उठाते रहेंगे ,या हुसैन कर्बला में शहीदों पे कोई रोने वाला न था लेकिन मौला हम जब तक ज़िंदा रहेंगे कर्बला को याद के के आंसू बहाते रहेंगे | मौला हुसैन आपका 6 महीने के झूले में रहने वाले अली असग़र को प्यासा शहीद कर दिया तो हम झूला उठाएंगे | या हुसैन आपका लाश कर्बला के बियाबान में पड़ा रहा किसी को इजाज़त न दी की उसे दफन किया जाय | हम आज ताबूत उठाते हैं हुसैन का और दफन करते हैं |
ताबूत इमाम हुसैन (अ )
ताबूत इमाम हुसैन (अ ) की क़ब्र की निशानी है या कह लें कर्बला में इमाम हुसैन की क़ब्र की शबीह हैं जिसे हम उठाते हैं और दफन करते हैं | ताबूत इमाम हुसैन के लाशे को उठाने की निशानी है जिसे हम दफन करते हैं | तुर्बत कर्बला की मिटटी इमाम हुसैन की क़ब्र को कहते हैं जिसके ऊपर गुम्बद नुमा रौज़ा बना हुआ है |



