आज शब् ऐ आशूरा है कर्बला में इमाम हुसैन और उनके असहाब पे परिवार पे सबसे सख्त रात | हज़रत मुहम्मद ने नवासे इमाम हुसैन के पास दो रास्ते थे या त...
इमाम हुसैन ने हक़ का साथ चुना और मानवता को इस्लाम मानते हुए यज़ीद की बैयत से इंकार कर दिया | अब यह तय हो गया की कल जंग होगी और लश्कर ऐ यज़ीद उनको क़त्ल करने की कोशिश करेगा और जो भी सामने उनकी हिमायत में आएगा उसे भी क़त्ल होना होगा |
इमाम हुसैन और उनके ७२ साथी रात भर इबादतों में लगे रहे और खुद को अपने बच्चों की जान हुसैन पे निछावर करने की तैयारी में लग गए और सुबह आशूर (१० मुहर्रम ) का इंतज़ार बेसब्री से सजदे में शुक्र के साथ करने लगे|
कल इस वक़्त ना हुसैन होंगे न अब्बास ना अली अकबर न क़ासिम न अली असग़र , बस जले हुए खेमे होंगे और बच्चों की अल अतश की सदायें होंगी | चारों तरफ चीख पुकार होगी और लश्कर ऐ यज़ीद का ज़ुल्म होगा |
पिसर का वक़्त आखिर है बड़ी तश्ना दहानी है |
एस एम् मासूम



