जवाहर अली खां का इमामबाड़ा , राठ हवेली फैज़ाबाद की अज़ादारी का इतिहास फैज़ाबाद के राठ हवेली इलाक़े में वहाँ का मशहूर इमामबाड़ा जवाहर अली खां की अ...
जवाहर अली खां का इमामबाड़ा , राठ हवेली फैज़ाबाद की अज़ादारी का इतिहास
फैज़ाबाद के राठ हवेली इलाक़े में वहाँ का मशहूर इमामबाड़ा जवाहर अली खां की अज़ादारी आज भी मशहूर है | इस इमामबाड़े को एक ख्वाजासरा जवाहर अली खां ने बहु बेगम उम्मातुज ज़हरा के शासन काल में बनवाया था | आज भी इमामबाड़े के मुख्य हाल में जवाहर अली खां और दराब अली खा की क़ब्रें मौजूद है |
लखौरी ईंट के बने इस इमामबाड़े की शहनशीन पांच दर की है जिसके बीच वाले दर में आज भी बहु बेगम के वक़्त की "ज़री "रखी हुयी है जिसके बारे में कहा जाता है की बहु बेगम ने इसे कर्बला से मंगवाया था | इस शहनशीन के दोनों तरफ मौला अली (अ ) ,इमाम हुसैन (अ ) और हज़रात अब्बास अलमदार और इमाम मूसा ऐ काज़िम (अ ) के रौज़े पे से लाया गया परचम मौजूद है

कर्बला से बहु बेगम द्वारा लायी ज़री
इसी इमामबाड़े से सटी एक मस्जिद भी है और बहु बेगम ने गाज़ीपुर के एक क़स्बे देवकठिया से मौलाना अब्दुल अली को इज़्ज़त दी और यहां का पेश ऐ इमाम बनाया | तब से लेकर आज तक पेश ऐ नमाज़ इसी घराने का हुआ करता है | आज मौलाना अहमद अली आबिदी उस घराने के मौजूद है | आज उसी घराने के लोग राठ हवेली में चरों तरफ बसे हुए हैं और यहां पे अज़ादारी बड़े शान से होती है जिसे फैज़ाबाद में "शाही मुहर्रम"के नाम से लोग जानते हैं |




दरगाह इमामबाड़ा जवाहर अली खां

कर्बला से लायी ज़री और क़ब्र जवाहर अली



